निर्माण कार्यों का विवरण

सर्वमङ्गल मांगल्ये, शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी, नारायणी नमोऽस्तुते॥

माँ ज्वाल्पा को स्मरण करते हुए अपने पूर्वजों को शत शत नमन जिनके अथक प्रयास, त्याग, तपस्या के फलस्वरूप अणथ्वाल जाति के ब्राह्मणों को भी ज्वाल्पा ने अपनी शरण देकर इस योग्य बनाया है कि आज इस पवित्र धाम में माँ ज्वाल्पा के सभी श्रद्धालू भक्त आकर माँ के पुजारी के चरण स्पर्श करते हैं, तो वे उसे माँ का सच्चा सेवक समझकर पूजा–अर्चना का उत्तरदायित्व समझते हैं। यह हमारा सौभाग्य है कि माँ ने हम सबको इस योग्य समझा है।

यह सब हमारे पूर्वज वंश स्वर्गीय श्री रामदेव जी की तपस्या का ही फल है जिनके अथक प्रयास से उस युग में मन्दिर का निर्माण क्षेत्रीय जनता के सहयोग से हो पाया आज उसका भव्य रूप हमें देखने को मिला हम उन्हीं सभी महानुभावों व दाताओं का भी सआभार व्यक्त करते हैं जिनके सहयोग से यह मन्दिर प्राचीन समय से आज तक (वर्ष 2025: तक) दान दाताओं के धन के फल स्वरूप दिन प्रतिदिन, विकास की ओर अग्रसर है

निर्माण कार्यों का विवरण

  1. शिवालय – स्वर्गीय श्री चैतराम जी, नौगाँव वालों ने बनवाया।
  2. प्रवेश द्वार – जे.एम.ओ., जिन्होंने सिंह द्वार वर्ष 1972-73 में बनवाया।

  3. विजय द्वार – गढ़वाल राइफल लैंसडाउन द्वारा वर्ष 1971-72 में बनवाया गया।

  4. सड़क से मन्दिर तक रास्ते का निर्माण – पी.डब्ल्यू.डी. पौड़ी द्वारा करवाया गया।

  1. मन्दिर प्रवेश द्वार – स्व० श्री बूथाराम नौगाँव वाले
  2. यात्री द्वार पथ का निर्माण – माता मँगला जी एवं योगी भोले महाराज हंस फांउंडेशन द्वारा बनवाया गया
  3.  गंगा द्वार – स्व० नारायण दत्त थपलियाल
  4. शिव द्वार – सुरेशानन्द थपलियाल
  5. हवन कुण्डी – श्री दिगम्बरदत्त थपलियाल
  6. काली माता का मन्दिर – श्री- डोभाल जी पौड़ी
  7. शौचालय – श्री तीरथ सिंह रावत भूत पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान सांसद पौड़ी
  8. स्नानाधार (दो)- ब्लॉक स्तर पर शासन द्वारा
  9. वन रक्षा रोपण – वन विभाग पौड़ी
  10. रैन बसेरा – श्री गणेश मणी अणथ्वाल पौड़ी वालों ने अपनी माता स्व० श्रीमती परेश्वरी देवी एवं पिता स्व० चन्द्रमणी अणथ्वाल की स्मृति में बनवाया

ज्वाल्पा देवी मंदिर परिसर में हुए निर्माण कार्यों का विवरण

मंदिर परिसर में विभिन्न सुविधाओं और संरचनाओं का निर्माण कई महानुभावों के सहयोग से किया गया, जिसका विवरण निम्नलिखित है

1. कमरा निर्माण (Rooms Construction)

कमरों का निर्माण निम्नलिखित महानुभावों के सामूहिक प्रयास से कराया गया:

  • हुकुम सिंह
  • गेंदा सिंह
  • श्री रामस्वरूप
  • भीम सिंह
  • आनंद सिंह

2. ज्वाल्पा (ज्वाला) माता का भोजनालय, ज्योतिष कर्मकांड एवं अध्ययन केंद्र की पाठशाला

इस महत्वपूर्ण निर्माण का कार्य वर्ष 2008-09 में निम्नलिखित परिवारों और व्यक्तियों की स्मृति में कराया गया:

(क) सिमलगांव गुराडस्युं परिवार द्वारा:

यह निर्माण कार्य श्रीमती आनंदी रावत, ग्राम सिमलगांव, गुराडस्युं द्वारा कराया गया। यह निर्माण कार्य निम्नलिखित सदस्यों की स्मृति में था:

  • स्वर्गीय मनवर सिंह रावत (पति)
  • जय सिंह रावत (ससुर जी)
  • दौथी देवी (सास जी)
  • त्रिलोक सिंह रावत (देवर जी)

(ख) रिंगवाडी रिंगवाडस्युं परिवार द्वारा:

यह निर्माण कार्य निम्नलिखित सदस्यों की स्मृति में किया गया:

  • स्वर्गीय हिम्मत सिंह रावत (पिताजी)
  • स्वर्गीय इंद्रामती देवी (माताजी)
  • धर्मेंद्र सिंह रावत (भतीजा)

(ग) घुइदौडस्युं निवासी द्वारा:

  • स्वर्गीय रामवाल सिंह गुसाईं

इस निर्माण कार्य की कुल लागत लगभग 9,000 थी।

3. धर्मशाला निर्माण (Dharamshala Construction)

यात्रियों के ठहरने हेतु धर्मशाला के निर्माण में निम्नलिखित व्यक्तियों का योगदान रहा:

    • गणेश
    • मनी डबराल
    • सिया
    • राजेंद्र सिंह
    • योगेंद्र सिंह
    • आनंद सिंह
    • लीला देवी
    • देवेश्वरी देवी

4. भंडार कक्ष (Store Room Construction)

भंडार कक्ष का निर्माण वर्ष 2011 में मात्र 5,000 की लागत से किया गया, जिसमें धनेश्वरी देवी और सावित्री देवी का प्रमुख योगदान रहा।

वेद-वेदांग संस्कृत विद्यापीठ

इस विद्यालय की स्थापना 2001 में की गई।

इसके लिए भूमि:

  1. श्री रमेश चंद अणथ्वाल (नौगाँव वालों ने) ने समस्त परिवार की ओर से अपने पूज्य पिताजी स्वर्गीय श्री बूथाराम की स्मृति में भूमि दान की।

  2. श्री कुलानंद अणथ्वाल (नौगाँव वालों ने) ने अपने पूज्य पिताजी श्री बूटीराम अणथ्वाल एवं ज्येष्ठ माता स्वर्गीय श्री चिंतामणि की स्मृति में अपनी तथा अनुज श्री आनंद मणि की ओर से कुल (1) एवं (2) पर एक नाली भूमि दान की है। जिसके लिए पूजा समिति आभारी है।

  3. इस भूमि पर पूजा समिति ने अणथ्वाल बंधुओं के सहयोग से दो बड़े कमरे व बरामदे का निर्माण किया।

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