ॐ जै ज्वाल्पा माता भुवनेश्वरि माता सब के कष्ट निवारिणि तू सबकी माता ।
माँ तू मंगलकारिणि तू संकटहारिणि ज्वाल्पा धाम विहारिणि सैरिभ संघाता।
चण्ड मुण्ड दानव संहारे मधु कैटभ मारे सुन नर मुनि उद्धारे त्रिभुवन विख्याता ।
तु घट घट की वासी भवसागर तारिणि अपने शरणागत जन की तू ध्रुक्ति सुक्ति दाता।
तू कर णा की सागर परम वत्सला माता जो तुझको मन से भजता, वह तुझको पाता।
भुवनेश्वरि ज्वाल्पा की आरती जो मन से भाता जन्म मरण भव बन्धन उसका कट जाता।