सिद्धपीठ माँ ज्वाल्पा देवी मंदिर, पौड़ी गढ़वाल

माँ ज्वाल्पा देवी मंदिर उत्तराखंड के प्रसिद्ध सिद्धपीठों में से एक है, जो पौड़ी से लगभग 34 किलोमीटर की दूरी पर नवालिका नदी के तट पर स्थित है। यह मंदिर देवी दुर्गा के ज्वाल्पा स्वरूप को समर्पित है। माँ ज्वाल्पा देवी को “ज्वाल्पा शक्ति” के नाम से भी जाना जाता है और यह स्थान भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र है।

ॐ जय माता दी

माँ ज्वाल्पा देवी मंदिर का स्थान और महत्व

माँ ज्वाल्पा देवी मंदिर नवालिका नदी (जिसे नवालिका गंगा भी कहा जाता है) के तट पर स्थित है। यह मंदिर पौड़ी से लगभग 34 किलोमीटर और सतपुली से लगभग 17 किलोमीटर की दूरी पर पौड़ी–कोटद्वार मार्ग पर स्थित है।

यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य से भी भरपूर है, जहाँ श्रद्धालु माँ के दर्शन के साथ-साथ शांत और पवित्र वातावरण का भी अनुभव करते हैं।

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श्री सरस्वती स्त्रोतम्

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला
या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा
या श्वेतपद्मासना ।
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिः
देवैः सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती
निःशेषजाड्यापहा ॥

ॐ जय ज्वाल्पा माता

ॐ जै ज्वाल्पा माता भुवनेश्वरि माता सब के कष्ट निवारिणि तू सबकी माता ।

माँ तू मंगलकारिणि तू संकटहारिणि ज्वाल्पा धाम विहारिणि सैरिभ संघाता।

चण्ड मुण्ड दानव संहारे मधु कैटभ मारे सुन नर मुनि उद्धारे त्रिभुवन विख्याता ।

तु घट घट की वासी भवसागर तारिणि अपने शरणागत जन की तू ध्रुक्ति सुक्ति दाता।

तू कर णा की सागर परम वत्सला माता जो तुझको मन से भजता, वह तुझको पाता।

भुवनेश्वरि ज्वाल्पा की आरती जो मन से भाता जन्म मरण भव बन्धन उसका कट जाता।

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