श्री ज्वाल्पा धाम – विशेष विवाह सेवा (Wedding Service)

स्थान: श्री ज्वाल्पा धाम, पत्रालय–पाटीसैंण, जिला–पौड़ी गढ़वाल, उत्तराखण्ड, पिन–246167

श्री ज्वाल्पा धाम माँ ज्वाल्पा देवी की पावन ऊर्जा से भरपूर एक ऐसा आध्यात्मिक स्थान है, जहाँ विवाह संस्कार को अत्यंत शुभ और पवित्र माना जाता है। यहाँ आयोजित विवाह न केवल दो जीवनों को जोड़ते हैं, बल्कि माँ ज्वाल्पा देवी की कृपा से नवविवाहित दंपत्ति के जीवन में प्रेम, समृद्धि और खुशियों का आशीर्वाद भी मिलता है।


विवाह के लिए यह स्थान क्यों विशेष है?

1. माँ ज्वाल्पा देवी का दिव्य इतिहास और आशीर्वाद

माँ ज्वाल्पा हिमालय की अधिष्ठात्री माँ पार्वती का ही स्वरूप मानी जाती हैं। मान्यता है कि वे अखण्ड ज्वाला के रूप में इस पवित्र स्थान पर प्रकट हुईं।
सतयुग में नवालिका नदी के पवित्र तट पर दैत्यराज पुलोम की पुत्री शची ने देवराज इन्द्र को पति रूप में प्राप्त करने हेतु कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर हिमालयेश्वरी देवी पार्वती ने दीप ब्वाल्पेश्वरी के रूप में दर्शन दिए तथा शची की मनोकामना पूर्ण की।

देवी पार्वती की इसी दिव्य ज्वाला-रूप प्रकटता के कारण यहाँ अखंड दीपक सदैव प्रज्वलित रहता है
इस पौराणिक इतिहास का वर्णन स्कन्द पुराण के केदारखण्ड में भी मिलता है।

आज यह स्थान शक्तिपीठ–सिद्धपीठ के रूप में प्रतिष्ठित है, जहाँ सच्चे मन से आने वाले भक्तों की मनोकामनाएँ माँ ज्वाल्पा अवश्य पूर्ण करती हैं।
इसी कारण यहाँ विवाह कराना अत्यंत शुभ, सफल और सौभाग्यदायक माना जाता है।


2. प्राकृतिक सौंदर्य और शांत वातावरण

मंदिर चारों ओर से हरे–भरे जंगलों, पर्वतीय वायु और पवित्र नवालिका घाटी के शांत वातावरण से घिरा है, जो विवाह समारोह को दिव्य और यादगार बनाता है।


3. पारंपरिक वैदिक विधि से विवाह

यहाँ अनुभवी पुजारी वैदिक परंपरा के अनुसार विवाह संपन्न कराते हैं, जिसमें शामिल हैं—

  • गणेश पूजन

  • वर–वधु पूजन

  • हवन

  • सप्तपदी

  • कन्यादान आदि पूरी विधि–विधान के साथ


4. सरल सुविधाएँ और व्यवस्था

मंदिर परिसर और आसपास विवाह के लिए आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध हैं, जैसे—

  • पंडित जी की व्यवस्था

  • पूजा एवं हवन सामग्री

  • प्रसाद

  • बैठने व ठहरने की मूलभूत व्यवस्था


5. परिवारजनों का शांत और आध्यात्मिक अनुभव

यह स्थान अपनी शांति, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक ऊर्जा के कारण दूर-दूर से आने वाले परिवारों को एक अविस्मरणीय दिव्य अनुभव प्रदान करता है।


विवाह के लिए सबसे शुभ समय

  • नवरात्रि

  • स्थानीय पर्व-त्योहार

  • वर्षभर उपलब्ध शुभ मुहूर्त
    (पंडित जी से परामर्श अनुसार)

इन दिनों यहाँ विवाह कराने का विशेष महत्व माना जाता है।


विशेष आकर्षण

  • विवाह के तुरंत बाद माता ज्वाल्पा देवी के दर्शन

  • नवविवाहित जोड़े पर आशीर्वाद स्वरूप दुग्धाभिषेक / चूनरी अर्पण

  • परिवार हेतु प्राकृतिक स्थल पर फोटो–वीडियोग्राफी की सुंदर व्यवस्था

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